(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.4. अध्यायः 004
(अथ पौलोमपर्व ॥ 4 ॥)
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
सौतिशौनकसंवादमुखेन कथोपोद्धातः॥ 1 ॥ रोमहर्षणपुत्र उग्रश्रवाः सौतिः पौराणिको नैमिशारण्ये शौनकस्य कुलपतेर्द्वादशवार्षिके सत्रे ऋषीनभ्यागतानुपतस्थे॥ 1-4-1 (888)पौराणिकः पुराणे कृतश्रमः स कृताञ्जलिस्तानुवाच। `मयोत्तङ्कस्य चरितमशेषमुक्तं जनमेजयस्य सार्पसत्रे निमित्तान्तरमिदमपि।' किं भवन्तः श्रोतुमिच्छन्ति किमहं ब्रवाणीति॥ 1-4-2 (889)तमृषय ऊचुः। 1-4-3x (25)परं रौमहर्षणे प्रवक्ष्यामस्त्वां नः प्रतिवक्ष्यसि वचः शुश्रूषतां कथायोगं नः कथायोगे॥ 1-4-3 (890)तत्र भगवान् कुलपतिस्तु शौनकोऽग्निशरणमध्यास्ते। `दीर्घसत्रत्वात्सर्वाः कथाः श्रोतुं कालोस्ति॥' 1-4-4 (891)यौऽसौ दिव्याः कथा वेद देवतासुरसंश्रिताः। मनुष्योरगगन्धर्वकथा वेद च सर्वशः॥ 1-4-5 (892)स चाप्यस्मिन्मशे सौते विद्वान्कुलपतिर्दिवजः। दक्षो धृतव्रतो धीमाञ्शास्त्रे चारण्यके गुरुः॥ 1-4-6 (893)सत्यवादी शमपरस्तपस्वी नियतव्रतः। सर्वेषामेव नो मान्यः स तावत्प्रतिपाल्यताम्॥ 1-4-7 (894)तस्मिन्नध्यासति गुरावासनं परमार्चितम्। ततो वक्ष्यसि यत्त्वां स प्रक्ष्यति द्विजसत्तमः॥ 1-4-8 (895)सौतिरुवाच। 1-4-9x (26)एवमस्तु गुरौ तस्मिन्नुपविष्टे महात्मनि। तेन पृष्टः कथाः पुण्या वक्ष्यामि विविधाश्रयाः॥ 1-4-9 (896)सोऽथ विप्रर्षभः सर्वं कृत्वा कार्यं यथाविधि। देवान्वाग्भिः पितॄनद्भिस्तर्पयित्वाऽऽजगाम ह॥ 1-4-10 (897)यत्र ब्रह्मर्षयः सिद्धाः सुखासीना धृतव्रताः। यज्ञायतनमाश्रित्य सूतपुत्रपुरस्पराः॥ 1-4-11 (898)ऋत्विक्ष्वथ सदस्येषु स वै गृहपतिस्तदा। उपविष्टेषूपविष्टः शौनकोऽथाब्रवीदिदम्॥ ॥ 1-4-12 (899)इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि चतुर्थोऽध्यायः॥ 4 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Footnotes
1-4-7 प्रतिपाल्यतां प्रतीक्ष्यतां॥ 1-4-10 वाग्भिः ब्रह्मयज्ञीयाभिः॥ चतुर्थोऽद्यायः॥ 4 ॥


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